जहां दवाईया इतनी मंहगी वही रोगो पर कम असर होती जा रही है ,चाहे वो चेहरे की सुन्दरता के लिए हो या अन्य रोगो के लिए तो ऐसे मे क्या विकल्प है ? आइये आज हम आपको बताने जा रहे है कि हम इलैक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा को अगर अपनाते है तो हमे क्या लाभ प्राप्त होते है । आप तो जानते ही आज के समय मे सभी लोग हर बीमारी मे चाहे वह बीमारी छोटी हो या बडी ,एलोपैथिक मेडिसिन का ही प्रयोग करते है ,परन्तु शायद कुछ लोग यह नही जानते की इन एलोपैथिक मेडिसिन के साइड इफैक्ट्स भी बहुत होते है ,जिस के कारण जहा यह एलोपैथिक मेडिसिन एक रोग को दबाती है वही दूसरे रोग का कारण बनती है । वही हर्बल इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिसिन का मानव शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नही पडता है और यह रोगो को चाहे वह नया है या पुराना बडी ही आसानी से जल्द से जल्द ठीक कर देती है । तो आइये जानते है इन इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक दवाओ के 5 फायदे के बारे मे , 1. यह रोग को जड़मूल से निकालने के साथ इन दवाओं का शरीर के किसी भी अंग पर दुष्प्रभाव(Drug bad effect or side effect) नहीं होता अर्थात इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक की दवाएं पूर्णत: हानिरहित है इनका को...
क्या है वेरीकोज वेन्स ? ये वे रक्त वाहिकाये होती है जो रक्त को ह्रदय की ओर ले जाती है । इनके अन्दर अशुद्ध रक्त होता है जो त्वचा के नीचे नीले रंग की नसो मे बहता है । यह रक्त आक्सीजन रहित होता है तथा आक्सीजन प्राप्ति के लिए ह्रदय से होता हुआ फेफडो मे जाता है वहा से शुद्ध होकर आक्सीजन प्राप्त कर फिर ह्रदय से होता हुआ लाल चमकदार रंग मे परिवर्तित होकर पूरे शरीर मे पहुंच जाता है । यह प्रक्रिया आपके शरीर मे लगातार चलती रहती है। आपने कभी अपनी त्वचा पर ध्यान दिया होगा तो आपने देखा होगा कि त्वचा के नीचे नीले रंग की नसे होती है जो अशुद्ध रक्त से भरी होती है तथा जब इन नसो पर रक्त का दबाव पडता है और किन्ही कारणो से रक्त आगे की ओर नही बढ पाता है या रूकावट आ जाती है तो यह नसे बढने लगती है और फूलकर मोटी हो जाती है इन्ही नसो को वेरीकोज वेन्स कहते है । वेरीकोज वेन्स के लक्षण-: • नीली व बैंगनी नसे • मांसपेशियो मे एठन • पैरो मे सूजन व भारीपन • पैरो मे टेढ़ी- मेढ़ी रस्सी जैसी नसे • लगातार खडे या बैठकर कार्य करने के बाद पैरो मे असहनीय दर्द • नसो के आसपास खुजली होना वेरीकोज वेन्स का...
आइये बात करते है फैटी लीवर के बारे मे , लीवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथी कहलाती है । लीवर हमारे शरीर मे भोजन को पचाने ,पित्त बनाने , संक्रमण से लडने , ब्लड-शुगर को नियंत्रित रखने और प्रोटीन का निर्माण करने मे एक अहम भूमिका निभाता है ,लीवर शरीर से विषैले पदार्थ को निकालने व फैट को कम करने का कार्य भी बहुत अच्छे से करता है । एक स्वस्थ लीवर मे फैट बहुत कम अथवा बिल्कुल भी नही होता है ,परन्तु अगर आप बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते है या बहुत अधिक भोजन खाते है तो आपका शरीर अतिरिक्त कैलोरी को वसा(फैट) मे बदल देता है , जिसे लीवर अपनी कोशिकाओ मे जमा कर लेता है ,और धीरे - धीरे लीवर मे फैट की मात्रा बढती चली जाती है । 90% लोगो मे अनियमित खानपान या अधिक शराब के पीने से इस वसा की मात्रा अत्यधिक बढ जाती है । जिसे फैटी लीवर कहा जाता है । पहले फैटी लीवर होने का मुख्य कारण शराब को ही माना जाता था । परन्तु अब बदलता लाइफस्टाइल भी फैटी लीवर का कारण बनता जा रहा है । आजकल के बदलते खानपान के कारण लगभग 30% लोगो मे फैटी लीवर की समस्या होने लगी है । फैटी लीवर के लोगो...
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