पिंडली का दर्द और इलैक्ट्रोहोम्योपैथी कभी-कभी पैर में दबाव, ज्यादा चलने के कारण नसों में तनाव या किसी अंदरुनी चोट के कारण से पिंडली में दर्द उठने लगता है। पिंडली में दर्द बढ़ने पर कई बार सूजन आ जाती है। पिंडली में दर्द होने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और एमआरआई स्कैन आदि की मदद से दर्द का कारण पता लगाते हैं। पिंडलियो मे दर्द होने पर चलने -फिरने , उठने -बैठने , सीढिया चढते समय कठिनाई आती है ओर दर्द होता है । कारण वैसे तो अधिकांश मामलो मे अंदरूनी चोट के कारण ही दर्द होता है परन्तु कई बार अन्य कारण भी होते है जैसे ● कई बार टाइट जूते पहनने से पिंडलियो मे दर्द बन जाता है । ● कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन के कारण भी ये दर्द हो सकता है । ● मिनरल की कमी के कारण आदि। सावधानी दर्द या सूजन होने पर अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करे , और दिन भर मे 5- 7 गिलास पानी पीये , जूते या चप्पल टाइट ना पहने और हो सके तो कपडे भी ज्यादा टाइट ना हो जैसे जींस उपचार पींडलियो मे दर्द होने पर इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिसिन का प्रयोग हितकारी है । ये हर...
क्या है वेरीकोज वेन्स ? ये वे रक्त वाहिकाये होती है जो रक्त को ह्रदय की ओर ले जाती है । इनके अन्दर अशुद्ध रक्त होता है जो त्वचा के नीचे नीले रंग की नसो मे बहता है । यह रक्त आक्सीजन रहित होता है तथा आक्सीजन प्राप्ति के लिए ह्रदय से होता हुआ फेफडो मे जाता है वहा से शुद्ध होकर आक्सीजन प्राप्त कर फिर ह्रदय से होता हुआ लाल चमकदार रंग मे परिवर्तित होकर पूरे शरीर मे पहुंच जाता है । यह प्रक्रिया आपके शरीर मे लगातार चलती रहती है। आपने कभी अपनी त्वचा पर ध्यान दिया होगा तो आपने देखा होगा कि त्वचा के नीचे नीले रंग की नसे होती है जो अशुद्ध रक्त से भरी होती है तथा जब इन नसो पर रक्त का दबाव पडता है और किन्ही कारणो से रक्त आगे की ओर नही बढ पाता है या रूकावट आ जाती है तो यह नसे बढने लगती है और फूलकर मोटी हो जाती है इन्ही नसो को वेरीकोज वेन्स कहते है । वेरीकोज वेन्स के लक्षण-: • नीली व बैंगनी नसे • मांसपेशियो मे एठन • पैरो मे सूजन व भारीपन • पैरो मे टेढ़ी- मेढ़ी रस्सी जैसी नसे • लगातार खडे या बैठकर कार्य करने के बाद पैरो मे असहनीय दर्द • नसो के आसपास खुजली होना वेरीकोज वेन्स का...
आइये बात करते है फैटी लीवर के बारे मे , लीवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथी कहलाती है । लीवर हमारे शरीर मे भोजन को पचाने ,पित्त बनाने , संक्रमण से लडने , ब्लड-शुगर को नियंत्रित रखने और प्रोटीन का निर्माण करने मे एक अहम भूमिका निभाता है ,लीवर शरीर से विषैले पदार्थ को निकालने व फैट को कम करने का कार्य भी बहुत अच्छे से करता है । एक स्वस्थ लीवर मे फैट बहुत कम अथवा बिल्कुल भी नही होता है ,परन्तु अगर आप बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते है या बहुत अधिक भोजन खाते है तो आपका शरीर अतिरिक्त कैलोरी को वसा(फैट) मे बदल देता है , जिसे लीवर अपनी कोशिकाओ मे जमा कर लेता है ,और धीरे - धीरे लीवर मे फैट की मात्रा बढती चली जाती है । 90% लोगो मे अनियमित खानपान या अधिक शराब के पीने से इस वसा की मात्रा अत्यधिक बढ जाती है । जिसे फैटी लीवर कहा जाता है । पहले फैटी लीवर होने का मुख्य कारण शराब को ही माना जाता था । परन्तु अब बदलता लाइफस्टाइल भी फैटी लीवर का कारण बनता जा रहा है । आजकल के बदलते खानपान के कारण लगभग 30% लोगो मे फैटी लीवर की समस्या होने लगी है । फैटी लीवर के लोगो...
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