मलेरिया के लक्षण और बचाव

 मलेरिया एक ऐसा रोग है जिसमे रोगी को सर्दी और सिरदर्द के साथ बार-बार बुखार आता है। इसमें बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी दुबारा आ जाता है। गंभीर मामलों में रोगी कोमा में चला जाता है या उसकी मृत्यु तक हो जाती है।


मलेरिया प्लाज़्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है। मलेरिया मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से शुरू होता है जो इस परजीवी को शरीर में छोड़ता है।








ज्यादातर यह रोग भूमध्य रेखा के आसपास उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है । भारत में यह रोग पूरे वर्ष रहता है। हालांकि मच्छर प्रजनन के कारण बारिश के दौरान और बारिश के बाद यह रोग अधिक लोगों को होता है। मलेरिया बरसात के मौसम में होने वाली सबसे आम लेकिन गंभीर बीमारी है। बरसात के मौसम में जगह-जगह जलभराव होता है जिससे मच्छर पनपते हैं।
दिसंबर 2016 में जारी किए गए नए WHO अनुमानों के मुताबिक मलेरिया के 21 करोड़ मामले सामने आए और इससे 42,000 मौतें हुईं। अकेले भारत मे मलेरिया के हर साल लगभग दस लाख मामले सामने आते है ।





मलेरिया के लक्षण- इस रोग के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के कुछ सप्ताह बाद दिखाई देते है जैसे ठंड लगना ,बुखार आना ,पसीना आना ,पेट दर्द, मांसपेशियो मे दर्द, उल्टी ,दस्त ,दिल की धड़कन तेज होना ,सिर दर्द होना आदि।





मलेरिया से बचाव - बाजार मे मच्छरो को मारने के लिए कई तरह के स्प्रे मौजूद है जो छुपे हुए मच्छरों को भी मार गिराते हैं। इसीलिए सोने से पहले अपने घर मे स्प्रे जरूर करे।





आप अपने बिस्तरे पर सोने से पहले मच्छरदानी भी लगा सकते है ,यह मच्छरो से बचने का एक बेहतरीन उपाय है 







लम्बे स्लीव्स वाले शर्ट और पैन्ट्स पहने ताकि मच्छर आप को काट ना पाए। मच्छर काले रंग या तेज रंगो के कपडो पर ज्यादा आकर्षित होते है तथा मच्छर हलके रंग वाले कपडो को कम पसंद करते  है। तो आप हल्के रंग या सफेद रंग के कपडे पहने।

अगर आप के रूम में एयर कंडीशनर नहीं है तो  फैन चलाये रखे। हवा फैलने से मच्छर कम आते है।


मच्छर स्थिर पानी वाले जगहों पे जल्दी बढ़ते है। निश्चित करे की आप के घर के आस पास स्थिर पानी नहीं है।






मलेरिया के  रोगी को क्या खिलाये-इस रोग की शुरुआत मे डॉक्टर आपको संतरे का जूस व केवल फल खाने की सलाह देते हैं। इस रोग में रोगी सुबह ताजा संतरे का जूस व दोपहर के खाने मे  फल खिलाना चाहिए जैसे -अनानास ,पपीता, संतरा, अंगूर, सेब, आम  यह बात अच्छी तरह से ध्यान रहे कि फ्रूट डाइट को लगातार दो दिन  या उससे अधिक दिनों तक खाएं। तीसरे दिन मरीज को फ्रूट डाइट के साथ-साथ दूध भी पीना चाहिए। दूध में फैट और प्रोटीन होते हैं, जो रोगी को उर्जा प्रदान करते है। चौथे से पांचवे दिन रोगी को साबुत दाना की खिचड़ी ,दलिया दे सकते है यह पाचन मे आसान व पोष्टिक होते है ।


मलेरिया के रोगी को क्या ना खिलाये -
मलेरिया रोग होने पर रोगी के खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योकि मलेरिया के रोगी की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है अतः रोगी को कुछ परहेज भी जरूरी है वह इन चीजो का भूल से भी सेवन न करे
अचार ,सोस,मीट -मसाले ,पेस्टी ,केक , शराब , चाय ,काफी ।

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