मधुमेह पर इलैक्ट्रोहोम्योपैथी का प्रभाव

 

आज हम आपको बताएंगे की मधुमेह पर इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिसिन कितनी कारगर है ।



सबसे पहले जानते है आखिर मधुमेह है क्या ?
मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारे दैनिक भोजन से प्राप्त होने वाला शुगर या ग्लूकोज खून में पहुंचने के बाद ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होता है ।यह अपरिवर्तित शुगर हमारे खून में बनी रहती और ब्लड-शुगर के स्तर को सामान्य से अधिक बढ़ा देती है । 



मधुमेह पर इलैक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिसिन का प्रभाव 

C17 औषधि का प्रभाव अग्नाशय या पैँक्रियाज नामक बाह्य और अन्त : स्त्रावी ग्रन्थि पर हैं । इस अन्त : स्त्रावी ग्रन्थि से इंसुलिन एवं ग्लुकौन नामक हार्मोन स्रावित होता हैं । जो शरीर की सभी कोशिकाओं के लिये ग्लूकोज ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ा देता है ।जिसके परिणाम स्वरूप कोशिकाएँ रक्त से अधिक ग्लूकोज ले कर उपयोग करने लगती हैं । इंसुलिन के कम स्राव से शरीर की कोशिकाएँ रक्त में संचारित ग्लूकोज नही ले पाती ,जिससे रक्त में ग्लूकोज की अधिक मात्रा होने पर मूत्र के साथ उत्सर्जित होने लगता हैं ।


मधुमेह का कारण?

हमारे शरीर मे एक अंग है,जिसे पैनक्रियाज या अग्नाश्य के रूप में जाना जाता है।
जब चैतन्य शक्ति पैँक्रियाज को नही मिल पाती हैं ,तब पैँक्रियाज कम अथवा बिल्कुल कार्य करना बन्द कर देता है ।जिससे रक्त में शुगर का संतुलन बिगड़ जाता हैं ।
तब पैँक्रियाज को W.E की धनात्मक खुराक से ठीक किया जा सकता हैं ।पैँक्रियाज  इन्सुलिन को स्रावित करता हैं । इंसुलिन का कार्य, शुगर को कोशिकाओं में पहुँचाना है ,जहां चयापचय (मेटाबोलिक) संबंधी गतिविधियों द्वारा ग्लूकोज/शुगर को ऊर्जा में परिवर्तित कर  दिया जाता है । पैनक्रियाज की खराबी इंसुलिन के स्राव को धीमा या समाप्त कर देती है। जिसके परिणामस्वरूप ब्लड-शुगर में वृद्धि होने लगती है जिसे मधुमेह कहा जाता है ।

दैनिक जीवन को मधुमेह कैसे प्रभावित करता है ?

मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति अत्यधिक थकान, बार-बार प्यास लगना, वजन घटने, भूख में वृद्धि, घावों के भरने में सामान्य से अधिक समय लगना, मुँह सूखने और पैरों में दर्द का बना रहना आदि समस्याओं से घिर जाता है।
यदि इसे नियंत्रित न किया जाये तो यह तंत्रिका तंत्र कि कमजोरी, नजर कमजोर होना, किडनी को नुकसान और हृदय संबधी समस्याएं आदि को जन्म देती है ।

मधुमेह के संभावित खतरे क्या हैं ?

ब्लड शुगर का नियमित उच्च स्तर ह्रदय सम्बन्धी समस्याओं, आँखों की रौशनी जाना, गैंगरीन, किडनी फेल होना, मस्तिष्क सम्बन्धी एवं यौन समस्याओं को पैदा करता है । इसीलिए मधुमेह को साइलेंट किलर भी कहा जाता है ।


मधुमेह मे इलैक्ट्रो होम्योपैथी कैसे काम करता है ?

इलैक्ट्रो होम्योपैथी  में उपस्थित विभिन्न पौधों के अर्क मधुमेह रोग के कारणों पर प्रहार करते हैं।और पेनक्रियाज को सक्रिय कर इन्सुलिन के स्राव को नियमित करते हैं
यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करके इन्सुलिन के प्रभाव में वृद्धि भी करता है । परिणामस्वरूप इलैक्ट्रो होम्योपैथी की औषधियां मधुमेह में ब्लड-शुगर के स्तर को अत्यंत प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में सक्षम है । इलैक्ट्रोहोम्योपैथी शरीर से विषैले तत्वों को हटाता है। और हीमोग्लोबिन के स्तर को भी बढ़ाता है । 
इस प्रकार इलैक्ट्रो होम्योपैथी  समग्र रूप से शरीर के सभी अंगों पर कार्य करके शुगर को ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करता है ।
इलैक्ट्रो होम्योपैथी की औषधिया  मधुमेह से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी निवारण करतीं हैं जैसे कि - मांसपेशियों में दर्द, कन्धों में दर्द, थकान, जलन, बार-बार पेशाब आना, नींद न आना और ज्यादा पैदल न चल पाना । इलैक्ट्रो होम्योपैथी की औषधियां इन  समस्याओं का बहुत ही प्रभावी ढंग से निवारण करने में सक्षम है ।
जब इंसुलिन का उत्पादन समान रहता हैं ।और इंसुलिन को लाने व ले जाने वाले रक्त एवं रस इंसुलिन को ग्रहण नही करते तब L ग्रुप या  A ग्रुप की औषधि का  प्रयोग करना चाहिये ।
अगर  कोशिकाये स्वयं इंसुलिन को ग्रहण ना कर पा रही हो ,तो C5 औषधि  का प्रयोग करें ।
इलैक्ट्रो होम्योपैथी की औषधियां अपने नजदीकी इलैक्ट्रोहोम्योपैथ चिकित्सक के परामर्श के बाद ही सेवन करे तथा इन दवाओ के साथ-साथ आप व्यायाम भी चिकित्सक की सलाह से अवश्य करे ।







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